श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.86.14

दशम स्कन्ध · अध्याय 86 · अथ षडशीतितमोऽध्यायः

स उवास विदेहेषु मिथिलायां गृहाश्रमी।

अनीहयाऽऽगताहार्यनिर्वर्तितनिजक्रियः ॥ १४

sa uvāsa videheṣu mithilāyāṃ gṛhāśramī|

anīhayā''gatāhāryanirvartitanijakriyaḥ || 14

अर्थ

वे गृहस्थाश्रममें रहते हुए भी किसी प्रकारका उद्योग नहीं करते थे; जो कुछ मिल जाता, उसीसे अपना निर्वाह कर लेते थे॥ १४॥

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