एक बार भगवान् श्रीकृष्णने उन दोनोंपर प्रसन्न होकर दारुकसे रथ मँगवाया और उसपर सवार होकर द्वारकासे विदेह देशकी ओर प्रस्थान किया॥ १७॥
तयोः प्रसन्नो भगवान् दारुकेणाहृतं रथम्।
आरुह्य साकं मुनिभिर्विदेहान् प्रययौ प्रभुः॥ १७
एक बार भगवान् श्रीकृष्णने उन दोनोंपर प्रसन्न होकर दारुकसे रथ मँगवाया और उसपर सवार होकर द्वारकासे विदेह देशकी ओर प्रस्थान किया॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.86.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 662) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/86/17/