परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्णके शुभागमनका समाचार सुनकर नागरिक और ग्रामवासियोंके आनन्दकी सीमा न रही। वे अपने हाथोंमें पूजाकी विविध सामग्रियाँ लेकर उनकी अगवानी करने आये॥ २२॥
तेऽच्युतं प्राप्तमाकर्ण्य पौरा जानपदा नृप।
अभीयुर्मुदितास्तस्मै गृहीतार्हणपाणयः॥ २२
परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्णके शुभागमनका समाचार सुनकर नागरिक और ग्रामवासियोंके आनन्दकी सीमा न रही। वे अपने हाथोंमें पूजाकी विविध सामग्रियाँ लेकर उनकी अगवानी करने आये॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.86.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 662) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/86/22/