श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.86.23

दशम स्कन्ध · अध्याय 86 · अथ षडशीतितमोऽध्यायः

दृष्ट्वा त उत्तमश्‍लोकं प्रीत्युत्फुल्लाननाशयाः।

कैर्धृतांजलिभिर्नेमुः श्रुतपूर्वांस्तथा मुनीन्॥ २३

dṛṣṭvā ta uttamaślokaṃ prītyutphullānanāśayāḥ|

kairdhṛtāṃjalibhirnemuḥ śrutapūrvāṃstathā munīn|| 23

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णका दर्शन करके उनके हृदय और मुखकमल प्रेम और आनन्दसे खिल उठे। उन्होंने भगवान्‌को तथा उन मुनियोंको, जिनका नाम केवल सुन रखा था, देखा न था—हाथ जोड़ मस्तक झुकाकर प्रणाम किया॥ २३॥

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