श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.86.31

दशम स्कन्ध · अध्याय 86 · अथ षडशीतितमोऽध्यायः

राजोवाच

भवान् हि सर्वभूतानामात्मा साक्षी स्वदृग् विभो।

अथ नस्त्वत्पदाम्भोजं स्मरतां दर्शनं गतः॥ ३१

bhavān hi sarvabhūtānāmātmā sākṣī svadṛg vibho|

atha nastvatpadāmbhojaṃ smaratāṃ darśanaṃ gataḥ|| 31

अर्थ

राजा बहुलाश्‍वने कहा—‘प्रभो! आप समस्त प्राणियोंके आत्मा, साक्षी एवं स्वयंप्रकाश हैं। हम सदा-सर्वदा आपके चरणकमलोंका स्मरण करते रहते हैं। इसीसे आपने हमलोगोंको दर्शन देकर कृतार्थ किया है॥ ३१॥

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