॥ श्रीहरिः ॥
दिनानि कतिचिद् भूमन् गृहान् नो निवस द्विजैः।
समेतः पादरजसा पुनीहीदं निमेः कुलम्॥ ३६
dināni katicid bhūman gṛhān no nivasa dvijaiḥ|
sametaḥ pādarajasā punīhīdaṃ nimeḥ kulam|| 36
अर्थ
एकरस अनन्त! आप कुछ दिनोंतक मुनिमण्डलीके साथ हमारे यहाँ निवास कीजिये और अपने चरणोंकी धूलसे इस निमिवंशको पवित्र कीजिये’॥ ३६॥
दिनानि कतिचिद् भूमन् गृहान् नो निवस द्विजैः।
समेतः पादरजसा पुनीहीदं निमेः कुलम्॥ ३६
एकरस अनन्त! आप कुछ दिनोंतक मुनिमण्डलीके साथ हमारे यहाँ निवास कीजिये और अपने चरणोंकी धूलसे इस निमिवंशको पवित्र कीजिये’॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.86.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 664) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/86/36/