श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.86.49

दशम स्कन्ध · अध्याय 86 · अथ षडशीतितमोऽध्यायः

स त्वं शाधि स्वभृत्यान् नः किं देव करवामहे।

एतदन्तो नृणां क्लेशो यद् भवानक्षिगोचरः॥ ४९✎ 1203

sa tvaṃ śādhi svabhṛtyān naḥ kiṃ deva karavāmahe|

etadanto nṛṇāṃ kleśo yad bhavānakṣigocaraḥ|| 49

अर्थ

स्वयंप्रकाश प्रभो! हम आपके सेवक हैं। हमें आज्ञा दीजिये कि हम आपकी क्या सेवा करें? नेत्रोंके द्वारा आपका दर्शन होनेतक ही जीवोंके क्लेश रहते हैं। आपके दर्शनमें ही समस्त क्लेशोंकी परिसमाप्ति है॥ ४९॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1203 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): नॄणां → नृणां

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