भगवान् श्रीकृष्णने कहा—प्रिय श्रुतदेव! ये बड़े-बड़े ऋषि-मुनि तुमपर अनुग्रह करनेके लिये ही यहाँ पधारे हैं। ये अपने चरणकमलोंकी धूलसे लोगों और लोकोंको पवित्र करते हुए मेरे साथ विचरण कर रहे हैं॥ ५१॥
ब्रह्मंस्तेऽनुग्रहार्थाय सम्प्राप्तान् विद्ध्यमून् मुनीन्।
संचरन्ति मया लोकान् पुनन्तः पादरेणुभिः॥ ५१
भगवान् श्रीकृष्णने कहा—प्रिय श्रुतदेव! ये बड़े-बड़े ऋषि-मुनि तुमपर अनुग्रह करनेके लिये ही यहाँ पधारे हैं। ये अपने चरणकमलोंकी धूलसे लोगों और लोकोंको पवित्र करते हुए मेरे साथ विचरण कर रहे हैं॥ ५१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.86.51 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 666) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/86/51/