श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.88.38

दशम स्कन्ध · अध्याय 88 · अथाष्टाशीतितमोऽध्यायः

मुक्तं गिरिशमभ्याह भगवान् पुरुषोत्तमः।

अहो देव महादेव पापोऽयं स्वेन पाप्मना॥ ३८

muktaṃ giriśamabhyāha bhagavān puruṣottamaḥ|

aho deva mahādeva pāpo'yaṃ svena pāpmanā|| 38

अर्थ

अब भगवान् पुरुषोत्तमने भयमुक्त शंकरजीसे कहा कि ‘देवाधिदेव! बड़े हर्षकी बात है कि इस दुष्टको इसके पापोंने ही नष्ट कर दिया। परमेश्‍वर! भला, ऐसा कौन प्राणी है जो महापुरुषोंका अपराध करके कुशलसे रह सके? फिर स्वयं जगद्गुरु विश्‍वेश्‍वर! आपका अपराध करके तो कोई सकुशल रह ही कैसे सकता है?’॥ ३८-३९॥

यह अर्थ श्लोक 38–39 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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