श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.89.42

दशम स्कन्ध · अध्याय 89 · अथैकोननवतितमोऽध्यायः

धिगर्जुनं मृषावादं धिगात्मश्‍लाघिनो धनुः।

दैवोपसृष्टं यो मौढ्यादानिनीषति दुर्मतिः॥ ४२

dhigarjunaṃ mṛṣāvādaṃ dhigātmaślāghino dhanuḥ|

daivopasṛṣṭaṃ yo mauḍhyādāninīṣati durmatiḥ|| 42

अर्थ

मिथ्यावादी अर्जुनको धिक्कार है! अपने मुँह अपनी बड़ाई करनेवाले अर्जुनके धनुषको धिक्कार है!! इसकी दुर्बुद्धि तो देखो! यह मूढ़तावश उस बालकको लौटा लाना चाहता है, जिसे प्रारब्धने हमसे अलग कर दिया है’॥ ४२॥

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