श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.89.43

दशम स्कन्ध · अध्याय 89 · अथैकोननवतितमोऽध्यायः

एवं शपति विप्रर्षौ विद्यामास्थाय फाल्गुनः।

ययौ संयमनीमाशु यत्रास्ते भगवान् यमः॥ ४३

evaṃ śapati viprarṣau vidyāmāsthāya phālgunaḥ|

yayau saṃyamanīmāśu yatrāste bhagavān yamaḥ|| 43

अर्थ

जब वह ब्राह्मण इस प्रकार उन्हें भला-बुरा कहने लगा, तब अर्जुन योगबलसे तत्काल संयमनीपुरीमें गये, जहाँ भगवान् यमराज निवास करते हैं॥ ४३॥✎ 1445 1446

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1445 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ति, → निऋर्ऋति,
  • #1446 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ऋति, → निर्ऋति,

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