॥ श्रीहरिः ॥
इतीदृशेन भावेन कृष्णे योगेश्वरेश्वरे।
क्रियमाणेन माधव्यो लेभिरे परमां गतिम्॥ २५
itīdṛśena bhāvena kṛṣṇe yogeśvareśvare|
kriyamāṇena mādhavyo lebhire paramāṃ gatim|| 25
अर्थ
परीक्षित्! श्रीकृष्ण-पत्नियाँ योगेश्वरेश्वर भगवान् श्रीकृष्णमें ऐसा ही अनन्य प्रेम-भाव रखती थीं। इसीसे उन्होंने परमपद प्राप्त किया॥ २५॥
इतीदृशेन भावेन कृष्णे योगेश्वरेश्वरे।
क्रियमाणेन माधव्यो लेभिरे परमां गतिम्॥ २५
परीक्षित्! श्रीकृष्ण-पत्नियाँ योगेश्वरेश्वर भगवान् श्रीकृष्णमें ऐसा ही अनन्य प्रेम-भाव रखती थीं। इसीसे उन्होंने परमपद प्राप्त किया॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.90.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 705) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/90/25/