श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.90.25

दशम स्कन्ध · अध्याय 90 · अथ नवतितमोऽध्यायः

इतीदृशेन भावेन कृष्णे योगेश्‍वरेश्‍वरे।

क्रियमाणेन माधव्यो लेभिरे परमां गतिम्॥ २५

itīdṛśena bhāvena kṛṣṇe yogeśvareśvare|

kriyamāṇena mādhavyo lebhire paramāṃ gatim|| 25

अर्थ

परीक्षित्! श्रीकृष्ण-पत्‍नियाँ योगेश्‍वरेश्‍वर भगवान् श्रीकृष्णमें ऐसा ही अनन्य प्रेम-भाव रखती थीं। इसीसे उन्होंने परमपद प्राप्त किया॥ २५॥

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