श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.90.33

दशम स्कन्ध · अध्याय 90 · अथ नवतितमोऽध्यायः

प्रद्युम्‍नश्‍चानिरुद्धश्‍च दीप्तिमान् भानुरेव च।

साम्बो मधुर्बृहद्भानुश्‍चित्रभानुर्वृकोऽरुणः॥ ३३

pradyumnaścāniruddhaśca dīptimān bhānureva ca|

sāmbo madhurbṛhadbhānuścitrabhānurvṛko'ruṇaḥ|| 33

अर्थ

प्रद्युम्‍न, अनिरुद्ध, दीप्तिमान्, भानु, साम्ब, मधु, बृहद्भानु, चित्रभानु, वृक, अरुण, पुष्कर, वेदबाहु, श्रुतदेव, सुनन्दन, चित्रबाहु, विरूप, कवि और न्यग्रोध॥ ३३-३४॥

यह अर्थ श्लोक 33–34 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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