॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.90.34
पुष्करो वेदबाहुश्च श्रुतदेवः सुनन्दनः।
चित्रबाहुर्विरूपश्च कविर्न्यग्रोध एव च॥ ३४
puṣkaro vedabāhuśca śrutadevaḥ sunandanaḥ|
citrabāhurvirūpaśca kavirnyagrodha eva ca|| 34
अर्थ
प्रद्युम्न, अनिरुद्ध, दीप्तिमान्, भानु, साम्ब, मधु, बृहद्भानु, चित्रभानु, वृक, अरुण, पुष्कर, वेदबाहु, श्रुतदेव, सुनन्दन, चित्रबाहु, विरूप, कवि और न्यग्रोध॥ ३३-३४॥