रुक्मीके दौहित्र अनिरुद्धजीने अपने नानाकी पोतीसे विवाह किया। उसके गर्भसे वज्रका जन्म हुआ। ब्राह्मणोंके शापसे पैदा हुए मूसलके द्वारा यदुवंशका नाश हो जानेपर एकमात्र वे ही बच रहे थे॥ ३७॥
स चापि रुक्मिणः पौत्रीं दौहित्रो जगृहे ततः।
वज्रस्तस्याभवद् यस्तु मौसलादवशेषितः॥ ३७
रुक्मीके दौहित्र अनिरुद्धजीने अपने नानाकी पोतीसे विवाह किया। उसके गर्भसे वज्रका जन्म हुआ। ब्राह्मणोंके शापसे पैदा हुए मूसलके द्वारा यदुवंशका नाश हो जानेपर एकमात्र वे ही बच रहे थे॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.90.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 706) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/90/37/