श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.1.19

एकादश स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

तच्चोपनीय सदसि परिम्लानमुखश्रियः।

राज्ञ आवेदयांचक्रुः सर्वयादवसन्‍निधौ॥ १९

taccopanīya sadasi parimlānamukhaśriyaḥ|

rājña āvedayāṃcakruḥ sarvayādavasannidhau|| 19

अर्थ

उस समय उनके चेहरे फीके पड़ गये थे। मुख कुम्हला गये थे। उन्होंने भरी सभामें सब यादवोंके सामने ले जाकर वह मूसल रख दिया और राजा उग्रसेनसे सारी घटना कह सुनायी॥ १९॥

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