॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.10.30
लोकानां लोकपालानां मद्भयं कल्पजीविनाम्।
ब्रह्मणोऽपि भयं मत्तो द्विपरार्धपरायुषः॥ ३०
lokānāṃ lokapālānāṃ madbhayaṃ kalpajīvinām|
brahmaṇo'pi bhayaṃ matto dviparārdhaparāyuṣaḥ|| 30
अर्थ
सारे लोक और लोकपालोंकी आयु भी केवल एक कल्प है, इसलिये मुझसे भयभीत रहते हैं। औरोंकी तो बात ही क्या, स्वयं ब्रह्मा भी मुझसे भयभीत रहते हैं; क्योंकि उनकी आयु भी कालसे सीमित—केवल दो परार्द्ध है॥ ३०॥