श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.10.30

एकादश स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

लोकानां लोकपालानां मद्भयं कल्पजीविनाम्।

ब्रह्मणोऽपि भयं मत्तो द्विपरार्धपरायुषः॥ ३०

lokānāṃ lokapālānāṃ madbhayaṃ kalpajīvinām|

brahmaṇo'pi bhayaṃ matto dviparārdhaparāyuṣaḥ|| 30

अर्थ

सारे लोक और लोकपालोंकी आयु भी केवल एक कल्प है, इसलिये मुझसे भयभीत रहते हैं। औरोंकी तो बात ही क्या, स्वयं ब्रह्मा भी मुझसे भयभीत रहते हैं; क्योंकि उनकी आयु भी कालसे सीमित—केवल दो परार्द्ध है॥ ३०॥

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