श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.11.24

एकादश स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

मदर्थे धर्मकामार्थानाचरन् मदपाश्रयः।

लभते निश्‍चलां भक्तिं मय्युद्धव सनातने॥ २४

madarthe dharmakāmārthānācaran madapāśrayaḥ|

labhate niścalāṃ bhaktiṃ mayyuddhava sanātane|| 24

अर्थ

मेरे आश्रित रहकर मेरे ही लिये धर्म, काम और अर्थका सेवन करना चाहिये। प्रिय उद्धव! जो ऐसा करता है, उसे मुझ अविनाशी पुरुषके प्रति अनन्य प्रेममयी भक्ति प्राप्त हो जाती है॥ २४॥

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