॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.12.9
यं न योगेन सांख्येन दानव्रततपोऽध्वरैः।
व्याख्यास्वाध्यायसंन्यासैः प्राप्नुयाद् यत्नवानपि॥ ९
yaṃ na yogena sāṃkhyena dānavratatapo'dhvaraiḥ|
vyākhyāsvādhyāyasaṃnyāsaiḥ prāpnuyād yatnavānapi|| 9
अर्थ
उद्धव! बड़े-बड़े प्रयत्नशील साधक योग, सांख्य, दान, व्रत, तपस्या, यज्ञ, श्रुतियोंकी व्याख्या, स्वाध्याय और संन्यास आदि साधनोंके द्वारा मुझे नहीं प्राप्त कर सकते; परन्तु सत्संगके द्वारा तो मैं अत्यन्त सुलभ हो जाता हूँ॥ ९॥