श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.13.19

एकादश स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

स मामचिन्तयद् देवः प्रश्‍नपारतितीर्षया।

तस्याहं हंसरूपेण सकाशमगमं तदा॥ १९

sa māmacintayad devaḥ praśnapāratitīrṣayā|

tasyāhaṃ haṃsarūpeṇa sakāśamagamaṃ tadā|| 19

अर्थ

उद्धव! उस समय ब्रह्माजीने इस प्रश्‍नका उत्तर देनेके लिये भक्तिभावसे मेरा चिन्तन किया। तब मैं हंसका रूप धारण करके उनके सामने प्रकट हुआ॥ १९॥

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