श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.13.20

एकादश स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

दृष्ट्वा मां त उपव्रज्य कृत्वा पादाभिवन्दनम्।

ब्रह्माणमग्रतः कृत्वा पप्रच्छुः को भवानिति॥ २०

dṛṣṭvā māṃ ta upavrajya kṛtvā pādābhivandanam|

brahmāṇamagrataḥ kṛtvā papracchuḥ ko bhavāniti|| 20

अर्थ

मुझे देखकर सनकादि ब्रह्माजीको आगे करके मेरे पास आये और उन्होंने मेरे चरणोंकी वन्दना करके मुझसे पूछा कि ‘आप कौन हैं?’॥ २०॥

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