॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.13.24
मनसा वचसा दृष्ट्या गृह्यतेऽन्यैरपीन्द्रियैः।
अहमेव न मत्तोऽन्यदिति बुध्यध्वमंजसा॥ २४
manasā vacasā dṛṣṭyā gṛhyate'nyairapīndriyaiḥ|
ahameva na matto'nyaditi budhyadhvamaṃjasā|| 24
अर्थ
मनसे, वाणीसे, दृष्टिसे तथा अन्य इन्द्रियोंसे भी जो कुछ ग्रहण किया जाता है, वह सब मैं ही हूँ, मुझसे भिन्न और कुछ नहीं है। यह सिद्धान्त आपलोग तत्त्व-विचारके द्वारा समझ लीजिये॥ २४॥