तैरहं पूजितः सम्यक् संस्तुतः परमर्षिभिः।
प्रत्येयाय स्वकं धाम पश्यतः परमेष्ठिनः॥ ४२
जब उन परमर्षियोंने भली-भाँति मेरी पूजा और स्तुति कर ली, तब मैं ब्रह्माजीके सामने ही अदृश्य होकर अपने धाममें लौट आया॥ ४२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.13.42 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 798) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/13/42/