श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.13.42

एकादश स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

तैरहं पूजितः सम्यक् संस्तुतः परमर्षिभिः।

प्रत्येयाय स्वकं धाम पश्यतः परमेष्ठिनः॥ ४२

tairahaṃ pūjitaḥ samyak saṃstutaḥ paramarṣibhiḥ|

pratyeyāya svakaṃ dhāma paśyataḥ parameṣṭhinaḥ|| 42

अर्थ

जब उन परमर्षियोंने भली-भाँति मेरी पूजा और स्तुति कर ली, तब मैं ब्रह्माजीके सामने ही अदृश्य होकर अपने धाममें लौट आया॥ ४२॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायामेकादशस्कन्धे त्रयोदशोऽध्यायः

॥ १३॥

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