श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.13.41

एकादश स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

इति मे छिन्‍नसन्देहा मुनयः सनकादयः।

सभाजयित्वा परया भक्त्यागृणत संस्तवैः॥ ४१

iti me chinnasandehā munayaḥ sanakādayaḥ|

sabhājayitvā parayā bhaktyāgṛṇata saṃstavaiḥ|| 41

अर्थ

प्रिय उद्धव! इस प्रकार मैंने सनकादि मुनियोंके संशय मिटा दिये। उन्होंने परम भक्तिसे मेरी पूजा की और स्तुतियोंद्वारा मेरी महिमाका गान किया॥ ४१॥

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