उद्धव! जैसे धधकती हुई आग लकड़ियोंके बड़े ढेरको भी जलाकर खाक कर देती है, वैसे ही मेरी भक्ति भी समस्त पाप-राशिको पूर्णतया जला डालती है॥ १९॥✎ 17441745
यथाग्निः सुसमृद्धार्चिः करोत्येधांसि भस्मसात्।
तथा मद्विषया भक्तिरुद्धवैनांसि कृत्स्नशः॥ १९
उद्धव! जैसे धधकती हुई आग लकड़ियोंके बड़े ढेरको भी जलाकर खाक कर देती है, वैसे ही मेरी भक्ति भी समस्त पाप-राशिको पूर्णतया जला डालती है॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.14.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 801) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/14/19/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)