श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.14.19

एकादश स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

यथाग्‍निः सुसमृद्धार्चिः करोत्येधांसि भस्मसात्।

तथा मद्विषया भक्तिरुद्धवैनांसि कृत्स्नशः॥ १९

yathāgniḥ susamṛddhārciḥ karotyedhāṃsi bhasmasāt|

tathā madviṣayā bhaktiruddhavaināṃsi kṛtsnaśaḥ|| 19

अर्थ

उद्धव! जैसे धधकती हुई आग लकड़ियोंके बड़े ढेरको भी जलाकर खाक कर देती है, वैसे ही मेरी भक्ति भी समस्त पाप-राशिको पूर्णतया जला डालती है॥ १९॥✎ 1744 1745

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1744 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: खिल-खिलाकर → खिलखिलाकर
  • #1745 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: पिघल-कर → पिघलकर

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