उद्धवजी! मैं समस्त प्राणियोंका आत्मा, हितैषी, सुहृद् और ईश्वर—नियामक हूँ। मैं ही इन समस्त प्राणियों और पदार्थोंके रूपमें हूँ और इनकी उत्पत्ति, स्थिति एवं प्रलयका कारण भी हूँ॥ ९॥✎ 17481749
अहमात्मोद्धवामीषां भूतानां सुहृदीश्वरः।
अहं सर्वाणि भूतानि तेषां स्थित्युद्भवाप्ययः॥ ९
उद्धवजी! मैं समस्त प्राणियोंका आत्मा, हितैषी, सुहृद् और ईश्वर—नियामक हूँ। मैं ही इन समस्त प्राणियों और पदार्थोंके रूपमें हूँ और इनकी उत्पत्ति, स्थिति एवं प्रलयका कारण भी हूँ॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.16.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 810) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/16/9/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)