॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.17.12
tretāmukhe mahābhāga prāṇānme hṛdayāttrayī|
vidyā prādurabhūttasyā ahamāsaṃ trivṛnmakhaḥ|| 12
अर्थ
परम भाग्यवान् उद्धव! सत्ययुगके बाद त्रेतायुगका आरम्भ होनेपर मेरे हृदयसे श्वास-प्रश्वासके द्वारा ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेदरूप त्रयीविद्या प्रकट हुई और उस त्रयीविद्यासे होता, अध्वर्यु और उद्गाताके कर्मरूप तीन भेदोंवाले यज्ञके रूपसे मैं प्रकट हुआ॥ १२॥
टिप्पणियाँ
- २
त्रेतायुगे।
- ३
त्तत्र।