श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.17.13

एकादश स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

विप्रक्षत्रियविट्शूद्रा मुखबाहूरुपादजाः।

वैराजात् पुरुषाज्जाता य आत्माचारलक्षणाः॥ १३

viprakṣatriyaviṭśūdrā mukhabāhūrupādajāḥ|

vairājāt puruṣājjātā ya ātmācāralakṣaṇāḥ|| 13

अर्थ

विराट् पुरुषके मुखसे ब्राह्मण, भुजासे क्षत्रिय, जंघासे वैश्य और चरणोंसे शूद्रोंकी उत्पत्ति हुई। उनकी पहचान उनके स्वभावानुसार और आचरणसे होती है॥ १३॥

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