श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.17.22

एकादश स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

द्वितीयं प्राप्यानुपूर्व्याज्जन्मोपनयनं द्विजः।

वसन् गुरुकुले दान्तो ब्रह्माधीयीत चाहुतः४॥ २२

dvitīyaṃ prāpyānupūrvyājjanmopanayanaṃ dvijaḥ|

vasan gurukule dānto brahmādhīyīta cāhutaḥ|| 22

अर्थ

ब्राह्मण, क्षत्रिय तथा वैश्य गर्भाधान आदि संस्कारोंके क्रमसे यज्ञोपवीत संस्काररूप द्वितीय जन्म प्राप्त करके गुरुकुलमें रहे और अपनी इन्द्रियोंको वशमें रखे। आचार्यके बुलानेपर वेदका अध्ययन करे और उसके अर्थका भी विचार करे॥ २२॥

टिप्पणियाँ

  1. ४

    चाग्र्यतः।

    (मुद्रित पृष्ठ 816)

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