श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.17.8

एकादश स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

इत्थं स्वभृत्यमुख्येन पृष्टः स भगवान् हरिः।

प्रीतः क्षेमाय मर्त्यानां धर्मानाह सनातनान्॥ ८

itthaṃ svabhṛtyamukhyena pṛṣṭaḥ sa bhagavān hariḥ|

prītaḥ kṣemāya martyānāṃ dharmānāha sanātanān|| 8

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! जब इस प्रकार भक्तशिरोमणि उद्धवजीने प्रश्‍न किया, तब भगवान् श्रीकृष्णने अत्यन्त प्रसन्‍न होकर प्राणियोंके कल्याणके लिये उन्हें सनातन धर्मोंका उपदेश दिया॥ ८॥

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