itthaṃ svabhṛtyamukhyena pṛṣṭaḥ sa bhagavān hariḥ|
prītaḥ kṣemāya martyānāṃ dharmānāha sanātanān|| 8
अर्थ
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! जब इस प्रकार भक्तशिरोमणि उद्धवजीने प्रश्न किया, तब भगवान् श्रीकृष्णने अत्यन्त प्रसन्न होकर प्राणियोंके कल्याणके लिये उन्हें सनातन धर्मोंका उपदेश दिया॥ ८॥
इत्थं स्वभृत्यमुख्येन पृष्टः स भगवान् हरिः।
प्रीतः क्षेमाय मर्त्यानां धर्मानाह सनातनान्॥ ८
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! जब इस प्रकार भक्तशिरोमणि उद्धवजीने प्रश्न किया, तब भगवान् श्रीकृष्णने अत्यन्त प्रसन्न होकर प्राणियोंके कल्याणके लिये उन्हें सनातन धर्मोंका उपदेश दिया॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.17.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 814) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/17/8/