श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.18.45

एकादश स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

भक्त्योद्धवानपायिन्या सर्वलोकमहेश्‍वरम्।

सर्वोत्पत्त्यप्ययं ब्रह्म कारणं मोपयाति सः॥ ४५

bhaktyoddhavānapāyinyā sarvalokamaheśvaram|

sarvotpattyapyayaṃ brahma kāraṇaṃ mopayāti saḥ|| 45

अर्थ

उद्धवजी! मैं सम्पूर्ण लोकोंका एकमात्र स्वामी, सबकी उत्पत्ति और प्रलयका परम कारण ब्रह्म हूँ। नित्य-निरन्तर बढ़नेवाली अखण्ड भक्तिके द्वारा वह मुझे प्राप्त कर लेता है॥ ४५॥

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