उस समय भीष्मपितामहके मुखसे सुने हुए मोक्षधर्म मैं तुम्हें सुनाऊँगा; क्योंकि वे ज्ञान, वैराग्य, विज्ञान, श्रद्धा और भक्तिके भावोंसे परिपूर्ण हैं॥ १३॥✎ 1753
तानहं तेऽभिधास्यामि देवव्रतमुखाच्छ्रुतान्।
ज्ञानवैराग्यविज्ञानश्रद्धाभक्त्युपबृंहितान्॥ १३
उस समय भीष्मपितामहके मुखसे सुने हुए मोक्षधर्म मैं तुम्हें सुनाऊँगा; क्योंकि वे ज्ञान, वैराग्य, विज्ञान, श्रद्धा और भक्तिके भावोंसे परिपूर्ण हैं॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.19.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 829) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/19/13/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)