श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.20.2

एकादश स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

वर्णाश्रमविकल्पं च प्रतिलोमानुलोमजम्।

द्रव्यदेशवयःकालान् स्वर्गं नरकमेव च॥ २

varṇāśramavikalpaṃ ca pratilomānulomajam|

dravyadeśavayaḥkālān svargaṃ narakameva ca|| 2

अर्थ

वर्णाश्रम-भेद, प्रतिलोम और अनुलोमरूप वर्णसंकर, कर्मोंके उपयुक्त और अनुपयुक्त द्रव्य, देश, आयु और काल तथा स्वर्ग और नरकके भेदोंका बोध भी वेदोंसे ही होता है॥ २॥

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