॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.23.40
इत्येके विहसन्त्येनमेके दुर्वातयन्ति च।
तं बबन्धुर्निरुरुधुर्यथा क्रीडनकं द्विजम्॥ ४०
ityeke vihasantyenameke durvātayanti ca|
taṃ babandhurnirurudhuryathā krīḍanakaṃ dvijam|| 40
अर्थ
कोई उस अवधूतकी हँसी उड़ाता, तो कोई उसपर अधोवायु छोड़ता। जैसे लोग तोता-मैना आदि पालतू पक्षियोंको बाँध लेते या पिंजड़ेमें बंद कर लेते हैं, वैसे ही उसे भी वे लोग बाँध देते और घरोंमें बंद कर देते॥ ४०॥