श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.23.41

एकादश स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

एवं स भौतिकं दुःखं दैविकं दैहिकं च यत्।

भोक्तव्यमात्मनो दिष्टं प्राप्तं प्राप्तमबुध्यत॥ ४१

evaṃ sa bhautikaṃ duḥkhaṃ daivikaṃ daihikaṃ ca yat|

bhoktavyamātmano diṣṭaṃ prāptaṃ prāptamabudhyata|| 41

अर्थ

किन्तु वह सब कुछ चुपचाप सह लेता। उसे कभी ज्वर आदिके कारण दैहिक पीड़ा सहनी पड़ती, कभी गरमी-सर्दी आदिसे दैवी कष्ट उठाना पड़ता और कभी दुर्जन लोग अपमान आदिके द्वारा उसे भौतिक पीड़ा पहुँचाते; परन्तु भिक्षुकके मनमें इससे कोई विकार न होता। वह समझता कि यह सब मेरे पूर्वजन्मके कर्मोंका फल है और इसे मुझे अवश्य भोगना पड़ेगा॥ ४१॥

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