श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.24.12

एकादश स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

देवानामोक आसीत् स्वर्भूतानां च भुवः पदम्।

मर्त्यादीनां च भूर्लोकः सिद्धानां त्रितयात् परम्॥ १२

devānāmoka āsīt svarbhūtānāṃ ca bhuvaḥ padam|

martyādīnāṃ ca bhūrlokaḥ siddhānāṃ tritayāt param|| 12

अर्थ

देवताओंके निवासके लिये स्वर्लोक, भूत-प्रेतादिके लिये भुवर्लोक (अन्तरिक्ष) और मनुष्य आदिके लिये भूर्लोक (पृथ्वीलोक) का निश्‍चय किया गया। इन तीनों लोकोंसे ऊपर महर्लोक, तपलोक आदि सिद्धोंके निवासस्थान हुए॥ १२॥

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