॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.24.11
सोऽसृजत्तपसा युक्तो रजसा मदनुग्रहात्।
लोकान् सपालान् विश्वात्मा भूर्भुवः स्वरिति त्रिधा॥ ११
so'sṛjattapasā yukto rajasā madanugrahāt|
lokān sapālān viśvātmā bhūrbhuvaḥ svariti tridhā|| 11
अर्थ
विश्वसमष्टिके अन्तःकरण ब्रह्माने पहले बहुत बड़ी तपस्या की। उसके बाद मेरा कृपा-प्रसाद प्राप्त करके रजोगुणके द्वारा भूः, भुवः, स्वः अर्थात् पृथ्वी, अन्तरिक्ष और स्वर्ग—इन तीन लोकोंकी और इनके लोकपालोंकी रचना की॥ ११॥