ये सभी पदार्थ मेरी प्रेरणासे एकत्र होकर परस्पर मिल गये और इन्होंने यह ब्रह्माण्ड-रूप अण्ड उत्पन्न किया। यह अण्ड मेरा उत्तम निवास-स्थान है॥ ९॥
मया संचोदिता भावाः सर्वे संहत्यकारिणः।
अण्डमुत्पादयामासुर्ममायतनमुत्तमम् ॥ ९
ये सभी पदार्थ मेरी प्रेरणासे एकत्र होकर परस्पर मिल गये और इन्होंने यह ब्रह्माण्ड-रूप अण्ड उत्पन्न किया। यह अण्ड मेरा उत्तम निवास-स्थान है॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.24.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 864) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/24/9/