इस प्रकार क्रमसे सत्त्वगुण, रजोगुण और तमोगुणकी अधिकांश वृत्तियोंका पृथक्-पृथक् वर्णन किया गया। अब उनके मेलसे होनेवाली वृत्तियोंका वर्णन सुनो॥ ५॥
सत्त्वस्य रजसश्चैतास्तमसश्चानुपूर्वशः।
वृत्तयो वर्णितप्रायाः सन्निपातमथो शृणु॥ ५
इस प्रकार क्रमसे सत्त्वगुण, रजोगुण और तमोगुणकी अधिकांश वृत्तियोंका पृथक्-पृथक् वर्णन किया गया। अब उनके मेलसे होनेवाली वृत्तियोंका वर्णन सुनो॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.25.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 867) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/25/5/