श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.25.5

एकादश स्कन्ध · अध्याय 25 · अथ पञ्चविंशोऽध्यायः

सत्त्वस्य रजसश्‍चैतास्तमसश्‍चानुपूर्वशः।

वृत्तयो वर्णितप्रायाः सन्‍निपातमथो शृणु॥ ५

sattvasya rajasaścaitāstamasaścānupūrvaśaḥ|

vṛttayo varṇitaprāyāḥ sannipātamatho śṛṇu|| 5

अर्थ

इस प्रकार क्रमसे सत्त्वगुण, रजोगुण और तमोगुणकी अधिकांश वृत्तियोंका पृथक्-पृथक् वर्णन किया गया। अब उनके मेलसे होनेवाली वृत्तियोंका वर्णन सुनो॥ ५॥

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