॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.27.35
अभ्यंगोन्मर्दनादर्शदन्तधावाभिषेचनम् ।
अन्नाद्यगीतनृत्यादि१ पर्वणि स्युरुतान्वहम्॥ ३५
abhyaṃgonmardanādarśadantadhāvābhiṣecanam |
annādyagītanṛtyādi parvaṇi syurutānvaham|| 35
अर्थ
भगवान्के विग्रहको दतुअन कराये, उबटन लगाये, पञ्चामृत आदिसे स्नान कराये, सुगन्धित पदार्थोंका लेप करे, दर्पण दिखाये, भोग लगाये और शक्ति हो तो प्रतिदिन अथवा पर्वोंके अवसरपर नाचने-गाने आदिका भी प्रबन्ध करे॥ ३५॥
टिप्पणियाँ
- १
अन्नादि गीतनृत्यादि मत्पर्वणि यथार्हतः।