श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.28.38

एकादश स्कन्ध · अध्याय 28 · अथाष्टाविंशोऽध्यायः

योगिनोऽपक्वयोगस्य युंजतः काय उत्थितैः।

उपसर्गैर्विहन्येत तत्रायं विहितो विधिः॥ ३८

yogino'pakvayogasya yuṃjataḥ kāya utthitaiḥ|

upasargairvihanyeta tatrāyaṃ vihito vidhiḥ|| 38

अर्थ

उद्धवजी! यदि योगसाधना पूर्ण होनेके पहले ही किसी साधकका शरीर रोगादि उपद्रवोंसे पीड़ित हो, तो उसे इन उपायोंका आश्रय लेना चाहिये॥ ३८॥

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