tatra matpādatīrthode snānopasparśanaiḥ śuciḥ|| 41
अर्थ
भगवान् श्रीकृष्णने कहा—उद्धवजी! अब तुम मेरी आज्ञासे बदरीवनमें चले जाओ। वह मेरा ही आश्रम है। वहाँ मेरे चरणकमलोंके धोवन गंगाजलका स्नानपानके द्वारा सेवन करके तुम पवित्र हो जाओगे॥ ४१॥✎ 1771
गच्छोद्धव मयाऽऽदिष्टो बदर्याख्यं ममाश्रमम्।
तत्र मत्पादतीर्थोदे स्नानोपस्पर्शनैः शुचिः॥ ४१
भगवान् श्रीकृष्णने कहा—उद्धवजी! अब तुम मेरी आज्ञासे बदरीवनमें चले जाओ। वह मेरा ही आश्रम है। वहाँ मेरे चरणकमलोंके धोवन गंगाजलका स्नानपानके द्वारा सेवन करके तुम पवित्र हो जाओगे॥ ४१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.29.41 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 895) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/29/41/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)