श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.29.41

एकादश स्कन्ध · अध्याय 29 · अथैकोनत्रिंशोऽध्यायः

श्रीभगवानुवाच

गच्छोद्धव मयाऽऽदिष्टो बदर्याख्यं ममाश्रमम्।

तत्र मत्पादतीर्थोदे स्नानोपस्पर्शनैः शुचिः॥ ४१

gacchoddhava mayā''diṣṭo badaryākhyaṃ mamāśramam|

tatra matpādatīrthode snānopasparśanaiḥ śuciḥ|| 41

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने कहा—उद्धवजी! अब तुम मेरी आज्ञासे बदरीवनमें चले जाओ। वह मेरा ही आश्रम है। वहाँ मेरे चरणकमलोंके धोवन गंगाजलका स्नानपानके द्वारा सेवन करके तुम पवित्र हो जाओगे॥ ४१॥✎ 1771

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1771 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: गंगा-जलका → गंगाजलका

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