॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.3.26
श्रद्धां भागवते शास्त्रेऽनिन्दामन्यत्र चापि हि।
मनोवाक्कर्मदण्डं च सत्यं शमदमावपि॥ २६
śraddhāṃ bhāgavate śāstre'nindāmanyatra cāpi hi|
manovākkarmadaṇḍaṃ ca satyaṃ śamadamāvapi|| 26
अर्थ
भगवान्की प्राप्तिका मार्ग बतलानेवाले शास्त्रोंमें श्रद्धा और दूसरे किसी भी शास्त्रकी निन्दा न करना, प्राणायामके द्वारा मनका, मौनके द्वारा वाणीका और वासनाहीनताके अभ्याससे कर्मोंका संयम करना, सत्य बोलना, इन्द्रियोंको अपने-अपने गोलकोंमें स्थिर रखना और मनको कहीं बाहर न जाने देना सीखे॥ २६॥