॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.3.27
श्रवणं कीर्तनं ध्यानं हरेरद्भुतकर्मणः।
जन्मकर्मगुणानां च तदर्थेऽखिलचेष्टितम्॥ २७
śravaṇaṃ kīrtanaṃ dhyānaṃ hareradbhutakarmaṇaḥ|
janmakarmaguṇānāṃ ca tadarthe'khilaceṣṭitam|| 27
अर्थ
राजन्! भगवान्की लीलाएँ अद्भुत हैं। उनके जन्म, कर्म और गुण दिव्य हैं। उन्हींका श्रवण, कीर्तन और ध्यान करना तथा शरीरसे जितनी भी चेष्टाएँ हों, सब भगवान्के लिये करना सीखे॥ २७॥