जब भगवान् श्रीकृष्णने देखा कि समस्त यदु-वंशियोंका संहार हो चुका, तब उन्होंने यह सोचकर सन्तोषकी साँस ली कि पृथ्वीका बचा-खुचा भार भी उतर गया॥ २५॥
एवं नष्टेषु सर्वेषु कुलेषु स्वेषु केशवः।
अवतारितो भुवो भार इति मेनेऽवशेषितः॥ २५
जब भगवान् श्रीकृष्णने देखा कि समस्त यदु-वंशियोंका संहार हो चुका, तब उन्होंने यह सोचकर सन्तोषकी साँस ली कि पृथ्वीका बचा-खुचा भार भी उतर गया॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.30.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 900) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/30/25/