भगवान् श्रीकृष्णका सारथि दारुक उनके स्थानका पता लगाता हुआ उनके द्वारा धारण की हुई तुलसीकी गन्धसे युक्त वायु सूँघकर और उससे उनके होनेके स्थानका अनुमान लगाकर सामनेकी ओर गया॥ ४१॥✎ 9071775
दारुकः कृष्णपदवीमन्विच्छन्नधिगम्य ताम्।
वायुं तुलसिकामोदमाघ्रायाभिमुखं ययौ॥ ४१
भगवान् श्रीकृष्णका सारथि दारुक उनके स्थानका पता लगाता हुआ उनके द्वारा धारण की हुई तुलसीकी गन्धसे युक्त वायु सूँघकर और उससे उनके होनेके स्थानका अनुमान लगाकर सामनेकी ओर गया॥ ४१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.30.41 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 902) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/30/41/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)