श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.30.40

एकादश स्कन्ध · अध्याय 30 · अथ त्रिंशोऽध्यायः

इत्यादिष्टो भगवता कृष्णेनेच्छाशरीरिणा।

त्रिः परिक्रम्य तं नत्वा विमानेन दिवं ययौ॥ ४०

ityādiṣṭo bhagavatā kṛṣṇenecchāśarīriṇā|

triḥ parikramya taṃ natvā vimānena divaṃ yayau|| 40

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्ण तो अपनी इच्छासे शरीर धारण करते हैं। जब उन्होंने जरा व्याधको यह आदेश दिया, तब उसने उनकी तीन बार परिक्रमा की, नमस्कार किया और विमानपर सवार होकर स्वर्गको चला गया॥ ४०॥

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