dvārakāyāṃ ca na stheyaṃ bhavadbhiśca svabandhubhiḥ|
mayā tyaktāṃ yadupurīṃ samudraḥ plāvayiṣyati|| 47
अर्थ
उनसे कहना कि ‘अब तुमलोगोंको अपने परिवारवालोंके साथ द्वारकामें नहीं रहना चाहिये। मेरे न रहनेपर समुद्र उस नगरीको डुबो देगा॥ ४७॥✎ 9071775
द्वारकायां च न स्थेयं भवद्भिश्च स्वबन्धुभिः।
मया त्यक्तां यदुपुरीं समुद्रः प्लावयिष्यति॥ ४७
उनसे कहना कि ‘अब तुमलोगोंको अपने परिवारवालोंके साथ द्वारकामें नहीं रहना चाहिये। मेरे न रहनेपर समुद्र उस नगरीको डुबो देगा॥ ४७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.30.47 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 903) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/30/47/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)