श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.30.50

एकादश स्कन्ध · अध्याय 30 · अथ त्रिंशोऽध्यायः

इत्युक्तस्तं परिक्रम्य नमस्कृत्य पुनः पुनः।

तत्पादौ शीर्ष्ण्युपाधाय दुर्मनाः प्रययौ पुरीम्॥ ५०

ityuktastaṃ parikramya namaskṛtya punaḥ punaḥ|

tatpādau śīrṣṇyupādhāya durmanāḥ prayayau purīm|| 50

अर्थ

भगवान्‌का यह आदेश पाकर दारुकने उनकी परिक्रमा की और उनके चरणकमल अपने सिरपर रखकर बारम्बार प्रणाम किया। तदनन्तर वह उदास मनसे द्वारकाके लिये चल पड़ा॥ ५०॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायामेकादशस्कन्धे
त्रिंशोऽध्यायः॥ ३०॥

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