महाराज! भगवान्के न रहनेपर समुद्रने एकमात्र भगवान् श्रीकृष्णका निवासस्थान छोड़कर एक ही क्षणमें सारी द्वारका डुबो दी॥ २३॥✎ 1778
द्वारकां हरिणा त्यक्तां समुद्रोऽप्लावयत् क्षणात्।
वर्जयित्वा महाराज श्रीमद्भगवदालयम्॥ २३
महाराज! भगवान्के न रहनेपर समुद्रने एकमात्र भगवान् श्रीकृष्णका निवासस्थान छोड़कर एक ही क्षणमें सारी द्वारका डुबो दी॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.31.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 906) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/31/23/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)